पोरबंदर से घूमते हुए गीर नेशनल पार्क पहुंचे । रास्ते में जहां से भी रास्ता समुन्दर के नजदीक से गुजरता समुद्री हवाओं की महक और समुद्र का शोर जरूर महसूस होता । यह हमारे लिए नई बात थी कि हमारा समुद्र से पहला साक्षात्कार एक दिन पहले पोरबंदर में ही हुआ था ।
राष्ट्रीय उद्यान गीर पहुँच कर हमने जंगल में अंदर जाने के लिए टिकट लिया । मिनी बस से जंगल के अंदर चले । जंगल का वह भाग हमारे वाल्मीकि नगर के जंगल से कम आकर्षक था । कुछ दूर आगे जाने पर दो शेरों को लेटा हुआ देखा । कुछ दुरी पर एक जिप्सी खड़ी देखी जिस पर कुछ जंगल कर्मी सवार थे । मिनी बस खड़ी हुई । सैलानी कौतुहल से शेरों को देख रहे थे और फोटो ले रहे थे ।
अचानक पानी बरसने लगा । शेर जैसे गहरी तन्द्रा से उठे । सुस्त लगे । पानी थोडा तेज हुआ । पानी से बचने के लिए वो एक तरफ भागे । जिप्सी में सवार कर्मी शेर के पीछे भागे । 10 मिनट के करीब पानी रुक गया । जिप्सी वाले उन दोनों को घेर कर फिर वहां ले आये । रस्ते के बगल में जहां बस रूकती थी और सैलानी इनको देखते ।
ऐसा प्रतीत हुआ कि इनको जबरन यहाँ घेर कर रखा जाता है कुछ शामक दवाओं के द्वारा ।
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Saturday, 17 July 2021
गीर राष्ट्रिय उद्यान, गुजरात
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